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Thursday, October 24, 2019

Maa Kaali


Form of shri kali

Kali is the Varnashyam of the Goddess. In which all the colors are embedded. Disorders of devotees - He has a residence in the crematorium of zero heart. The life contained in the Bhagwati Chittashakti is located on the seat of a powerful corpse. He has the nectar-proof moon on his red, and he is a triple-headed, uninterrupted woman. Surya Chandra and Agni are the three eyes with which they look at all three. He is suppressing Rajoguna-Tamogun's tongue with bright teeth. Because of being able to follow the whole world, he is an advanced lover. She carries a garland of fifty-nine letters and is free from myriad veil and all creatures depend on her till she does not get salvation.
She cuts the myopia loop of Nishkam devotees with the sword of knowledge, she is the great God who gives real power to the power of Kaal.
Apart from this, the description of the bloodbird Mardini Shri Kali is as follows.
The entire vicious body is shining black. His big scary eyes and tongue are left out of his mouth. Which is dark red in color. He is wearing the posture of Narmundo's garland and severed arms. In his one hand, the Khadga blesses the devotees with the trident in the third, the Khappar in the third and the fourth hand.
Say Jai Mahakali Jai

श्री काली का स्वरूप
काली देवी का वर्णश्याम है. जिसमे सभी रंग सन्निहित है. भक्तो के विकार - शुन्य ह्रदय रुपी श्मशान में उनका निवास है. भगवती चित्त्शक्ति में समाहित प्राण शक्तिरुपी शव के आसन पर स्थित है. उनके लाल पर अमृत तत्व बोधक चन्द्रमाँ है और वे त्रगुनातीत निर्विकार केशिनी है. सूर्य चन्द्र और अग्नि ये तीनो उनके नेत्र है जिनसे वे तीनो कालो को देखती है. वे सतोगुण रुपी उज्ज्वल दांतों से रजोगुण - तमोगुण रुपी जीभ को दबाये हुए है. सारे संसार का पालन करने में सक्षम होने के कारन वे उन्नत पीनपयोधर है. वे पचास मात्रका अक्षरों की माला धारण करती है तथा मायारूपी आवरण से मुक्त है तथा सभी जीव मोक्ष न होने तक उनके आश्रित रहते है
वे निष्काम भक्तो के मायारूपी पाश को ज्ञान रुपी तलवार से काट देती है , वे काल रुपी शक्ति को वास्तविक शक्ति देने वाली विराट भगवती है.
इसके अतरिक्त रक्तबीज मर्दिनी श्री काली का स्वरूप वर्णन इस प्रकार है
सम्पूर्ण विकराल देह चमकते हुए काले रंग की है. उनकी बड़ी बड़ी डरावनी आँखे और मुख से जीभ को बहार निकले हुए है. जो गहरे लाल रंग की है . वह नरमुंडो की माला तथा कटे हुए हाथो का आसन धारण किये हुए है. उनके एक हाथ मे खड्ग , दुरसे में त्रिशूल, तीसरे मे खप्पर तथा चौथे हाथ से भक्तो को आशीर्वाद प्रदान करती है
बोलिए जय महाकाली की जय

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