Monday, November 4, 2019

Lord Shri Krishna in the eyes of Bhishma Pitamah







Lord Shri Krishna in the eyes of Bhishma Pitamah



 Lord Krishna told Arjuna,
 "The one who sacrifices me while thinking, attains my ultimate abode, of course, forever. The person who contemplates at the time of death, gets reborn when he is reborn."
 Bhishma Deva used to meditate on his revered Lord Shri Krishna as "Parthasarathy" i.e. the charioteer of Arjuna.  Therefore, he prayed:
 "Lord Krishna, the quadrilateral, with his beautiful, well-decorated lotus face and bright eyes like the sunrise, and with a sweet smile, please be before me while sacrificing my body."




भगवान श्रीकृष्ण भीष्म पितामह की नजरों में 


हरे कृष्णा जी दंडवत प्रणाम.
श्रीमान प्रेम बल्लभ प्रभु जी दंडवत प्रणाम.
सुन्दर कीर्तनीय सदा हरी...
भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को कहा था ,
" जो मेरा चिन्तन करते हुए शरीर-त्याग करता है, वह नि:सन्देह सदैव के लिए, मेरे परम धाम को प्राप्त करता है। मृत्यु के समय व्यक्ति जिस विषय का चिंतन करता है, पुनर्जन्म लेने पर उसे उसी की प्राप्ति होती है।"
भीष्मदेव अपने पूज्य भगवान श्री कृष्ण का ध्यान "पार्थासारथी" अर्थात अर्जुन के सारथी के रूप में करते थे। इसलिए, उन्होंने यह प्रार्थना की थी :
" चतुर्भुज भगवान श्री कृष्ण अपने सुंदर,सुसज्जित कमल मुख-मण्डल एवं सूर्योदय के समान तेजस्वी नेत्रों, व मधुर मुस्कान के साथ, कृपा कर, मेरे शरीर त्याग करते समय मेरे सम्मुख ही रहें ।"

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