Sunday, November 10, 2019

Worshiping Shiva increases self-esteem

Worshiping Shiva increases self-esteem… 


In Shiva worship, purity is given importance, the basis of which is fruit. Behavior is purified with fruit. Every living being is a part of Shiva and when he worships it, there is inner happiness. The importance of bell-leaf, incense, flowers, water is for Shiva worship, but is very pleased with Shiva-Shraddha, because Shraddha is Jagjjananiparvati and Sadashiv Bhagwan Shankar himself is a believer. The worship of Shivalinga in Shravan is very important, because Shivalinga is also a Deity of Lord Shiva in itself. It is also called all-round, because it has faces around it. In our Satanatadharma, there are 33 crore deities, their worship is accepted without a call in the Shivling. Shiva should be worshiped for autobiography and not for worldly splendor.

 Panchakshari Mantra is: Om Namah: Shivaaya… ॐ Devadhidev Mahadev is called Omkar. He is the eternal truth.

 Chanting "Om Namah Shivaaya" should be done 108 times.

 Chanting Mahamrityunjaya Mantra is a great mantra to please Lord Shiva and remove all kinds of obstacles. By chanting this mahamantra 108 times, all sorrows of the creature are destroyed. The mantra is: -

 "Un trimbakan yajamhe sugandhin pustivardhanam, urvarukamiv bandhananmruityumurkshiya mamritat


शिव की आराधना से आत्मबल में वृद्धि होती है… 


शिव अराधना में शुद्धता को महत्व दिया जाता है, जिसका आधार फलाहार है। फलाहार से व्यवहार शुद्ध होता है। हर जीव शिव का ही अंश है और जब वह इसकी आराधना करता है तो अंत:सुखकी प्राप्ति होती है। शिव पूजा के लिए बेलपत्र,धूप, पुष्प, जल की महत्ता तो है ही, मगर शिव-श्रद्धा से अति प्रसन्न होते हैं, क्योंकि श्रद्धा जगज्जननीपार्वती हैं और सदाशिवभगवान शंकर स्वयं विश्वास हैं। श्रावण में शिवलिंगकी पूजा का काफी महत्व है, क्योंकि शिवलिंगभी अपने आप में भगवान शिव का ही एक विग्रह है। इसे सर्वतोमुखी भी कहा गया है, क्योंकि इसके चारों ओर मुख होते हैं। हमारे सतानतधर्म में जो 33करोड देवता हैं, उनकी पूजा शिवलिंगमें बिना आह्वान के ही मान्य हो जाती है। शिव की पूजा वस्तुत:आत्मकल्याण के लिए ही किया जाना चाहिए, न कि सांसारिक वैभव के लिए।

पंचाक्षरीमंत्र है- ऊँ नम: शिवाय… ॐ देवाधिदेव महादेव को ही ओंकार कहतें हैं .ओंकार ही शाश्वत सत्य है .

“ऊँ नम: शिवाय” का जाप 108 बार करना चाहिए.

महामृत्युंजय मंत्र का जाप शिव भगवान को प्रसन्न करने का तथा सभी प्रकार की बाधाओं को दूर करने का महामंत्र है. इस महामंत्र का 108 बार जाप करने से प्राणी के सभी दु:खों का नाश होता है. मंत्र है :-

“ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम, उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात”

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