Monday, November 11, 2019

Lord Shiva's Leela





Why did Lord Shiva drink poison?


 Lord Shankar carried the poison emanating from the sea churning made by the gods and demons. His throat became blue due to the effects of poison and he became famous as Neelkanth. Samudra churning means churning your mind, churning thoughts. There are innumerable thoughts and feelings in the mind to churn them out and adopt good ideas. When we churn our mind, first of all bad thoughts will come out. These are poisons, poisons symbolize evil. Shiva held him in his throat. He did not let it dominate him. Drinking the poison of Shiva gives us the message that we should not let evils dominate us. Evils must be faced at every step. Drinking poison by Shiva also teaches that if any evil is being born, we should not let it reach others.


भगवान शिव ने क्यों पीया था जहर?


देवताओं और दानवों द्वारा किए गए समुद्र मंथन से निकला विष भगवान शंकर ने अपने कंठ में धारण किया था। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ के नाम से प्रसिद्ध हुए। समुद्र मंथन का अर्थ है अपने मन को मथना, विचारों का मंथन करना। मन में असंख्य विचार और भावनाएं होती हैं उन्हें मथ कर निकालना और अच्छे विचारों को अपनाना। हम जब अपने मन को मथेंगे तो सबसे पहले बुरे विचार ही निकलेंगे। यही विष हैं, विष बुराइयों का प्रतीक है। शिव ने उसे अपने कंठ में धारण किया। उसे अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। शिव का विष पीना हमें यह संदेश देता है कि हमें बुराइयों को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। बुराइयों का हर कदम पर सामना करना चाहिए। शिव द्वारा विष पीना यह भी सीख देता है कि यदि कोई बुराई पैदा हो रही हो तो हम उसे दूसरों तक नहीं पहुंचने दें




Why does Shiva incinerate his body?


 In our religious scriptures, where all the Gods and Goddesses have been described as equipped with clothes and ornaments, Lord Shankar is said to have wrapped and consumed only the deer skin (deer skin). Bhasma is also Shiva's main garment as Shiva's entire body remains covered with ash. There are some scientific and spiritual reasons behind Shiva's ashes. A feature of Bhasma is that it closes the pores of the body. Its main quality is that applying it on the body does not cause heat in summer and winter in winter. Bhasmi also works as a medicine for skin diseases. Shiva, who is wearing ashram, also gives the message that according to the circumstances, molding oneself is the greatest quality of man.


शिव अपने शरीर पर भस्म क्यों लगाते हैं?


हमारे धर्म शास्त्रों में जहां सभी देवी-देवताओं को वस्त्र-आभूषणों से सुसज्जित बताया गया है वहीं भगवान शंकर को सिर्फ मृग चर्म (हिरण की खाल) लपेटे और भस्म लगाए बताया गया है। भस्म शिव का प्रमुख वस्त्र भी है क्योंकि शिव का पूरा शरीर ही भस्म से ढंका रहता है। शिव का भस्म रमाने के पीछे कुछ वैज्ञानिक तथा आध्यात्मिक कारण भी हैं। भस्म की एक विशेषता होती है कि यह शरीर के रोम छिद्रों को बंद कर देती है। इसका मुख्य गुण है कि इसको शरीर पर लगाने से गर्मी में गर्मी और सर्दी में सर्दी नहीं लगती। भस्मी त्वचा संबंधी रोगों में भी दवा का काम करती है। भस्मी धारण करने वाले शिव यह संदेश भी देते हैं कि परिस्थितियों के अनुसार अपने आपको ढालना मनुष्य का सबसे बड़ा गुण है।




Why the trident in the hands of Lord Shiva?


The trident is the main weapon of Lord Shiva. If you see the picture symbol of the trident, there are three pointed ends. Although this weapon is a symbol of destruction, in fact, it tells a very cryptic thing. There are three types of trends in the world - Sat, Raz and Tama. Sat means satvik, raja means worldly and tam means tamasi means nocturnal nature. These three trends are found in every human being. The only difference is that their quantity varies. The three pointed ends of the trident represent these three trends. Through the trident, Lord Shiva gives the message that we should have complete control over these qualities. This trident should be raised only when a problem arises. Only then these three qualities are used as required.


भगवान शिव के हाथ में त्रिशूल क्यों?


त्रिशूल भगवान शिव का प्रमुख अस्त्र है। यदि त्रिशूल का प्रतीक चित्र देखें तो उसमें तीन नुकीले सिरे दिखते हैं। यूं तो यह अस्त्र संहार का प्रतीक है पर वास्तव में यह बहुत ही गूढ़ बात बताता है। संसार में तीन तरह की प्रवृत्तियां होती हैं- सत, रज और तम। सत मतलब सात्विक, रज मतलब सांसारिक और तम मतलब तामसी अर्थात निशाचरी प्रवृति। हर मनुष्य में ये तीनों प्रवृत्तियां पाई जाती हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि इनकी मात्रा में अंतर होता है। त्रिशूल के तीन नुकीले सिरे इन तीनों प्रवृत्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। त्रिशूल के माध्यम से भगवान शिव यह संदेश देते हैं कि इन गुणों पर हमारा पूर्ण नियंत्रण हो। यह त्रिशूल तभी उठाया जाए जब कोई मुश्किल आए। तभी इन तीन गुणों का आवश्यकतानुसार उपयोग हो।

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