Wednesday, November 6, 2019

Meaning of lord shiva


Meaning of lord shiva


Being Shiva means a life lived above me and me.
 Where there is life but there is no attachment towards #life and where there is # relationship but no passion and malice towards anyone.
 🌺 Where there is # love but no attachment and where there is familiarity but no attachment.  Where #Aishwarya is there but not Vilas and where there is #visible #Ma Annapurna but not enjoyment.  Where there is dance, there is music, # sacrifice and yoga is there but not pride.
  That #status of life when we learn to live even in asymmetry, when we learn how to eat food by sharing it without being disinterested, and when we learn to live in #Ram instead of work, it is really to become Shiva.



भगवान शिव का अर्थ 


शिव होने का अर्थ है, एक ऐसा जीवन जो मैं और मेरे से ऊपर जिया गया हो।
जहाँ जीवन तो है मगर #जीवन के प्रति आसक्ति नहीं और जहाँ #रिश्ते तो हैं मगर किसी के भी प्रति राग और द्वेष नहीं।
🌺 जहाँ #प्रेम तो है मगर मोह नहीं और जहाँ अपनापन तो है मगर मेरापन नहीं। जहाँ #ऐश्वर्य तो है मगर विलास नहीं और जहाँ साक्षात #माँ अन्नपूर्णा है मगर भोग नहीं। जहाँ नृत्य भी है, संगीत भी है, #त्याग भी है और योग भी है मगर अभिमान नहीं।
🌺 जीवन की वह #स्थिति जब हम विषमता में भी जीना सीख जाएँ, जब हम निर्लिप्त रह कर बांटकर #खाना सीख जाएँ और जब हम काम की जगह #राम में जीना सीख जाएँ, वास्तव में शिव हो जाना ही है।



Shiv....


 In this world all are shiva and all are shiva!  Shiva is part, part, quantity… All are drops of the same ocean.

 Shiva - beyond any definition.  Trying to define Shiva will also be a courage.  An impossible mission would be… Shiva can only be experienced, cannot be understood by intelligence.  He is beyond intellect, beyond ideas.  Where is a huge ocean that can be contained in a small bowl!

 There are many aspects of Shiva from the understanding of human… There is a different identity which fades from time to time.  Shiva is a supreme parabrahma, a finite being.

 Shiva represents human existence as a homeowner.  A god who is with wife and children, yet is excellent and powerful in spirituality.  At the same time he is a householder and also a guru.  The Guru of the Gurus, the Supreme Guru and the saint of all saints .. The greatest saint who is also with time and is also timeless….

 On the other hand, Shiva is the form of Parabrahma - is formless, and is beyond time and space.  Shiva is inseparable unity.  Shiva has no beginning or end.  He is Parabrahmam.  Love is devotion for your adorable.









शिव....


इस संसार में सारे शिवमय है सारे शिव है! शिव के ही अंग है, अंश है, मात्रा है…सभी एक ही सागर की बुँदे है.

शिव – किसी भी परिभाषा से परे है. शिव को परिभाषित करने का प्रयास भी एक साहस ही होगा. एक नामुमकिन मिशन होगा…शिव को केवल अनुभव किया जा सकता है, बुद्धि से समझा नहीं जा सकता. वह बुद्धि से परे है, विचारों से परे है . एक विशाल सागर कहा एक छोटी कटोरी में समा सकता है भला!

मानव की समझ से शिव के कई पहलू है… अलग पहचान है जो समय-समय पर धुंधला जाती है. शिव एक सर्वोच्च परब्रम्ह है, एक परिमित अस्तित्व है.

शिव एक गृहस्वामी के रूप में मानव अस्तित्व का प्रतिनिधित्व करता है. एक देव जो पत्नी और बच्चों के साथ है, फिर भी अतिश्रेष्ठ व आध्यात्मिकता में अतिदृढ़ और शक्तिशाली है. एक ही समय में वह एक गृहस्थ है और एक गुरु भी है. गुरुओंके गुरु सर्वोच्च गुरु और सभी संतों के संत.. महानतम संत जो समय के साथ साथ भी है और कालातीत भी है….

दूसरी ओर, शिव परब्रह्म के रूप है -निराकार है, और समय और स्थान से परे है. शिव अविभाज्य एकात्मकता है. शिव की कोई शुरूआत या अंत नहीं है. वह परब्रह्मम है।। अपने आराध्य के लिए प्रेम ही भक्ति है।।

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